जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में, पहली बार आरएसएस का पथ संचलन आयोजित किया गया। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना का 98वाँ वर्षगाँठ इस विजयदशमी को मना रहा है। इस पथ संचलन में लगभग 200 छात्रों ने गणवेश में भाग लिया। पथ संचलन चंद्रभागा हॉस्टल से शुरू होकर वेदांत स्थल पर जाकर खत्म हुआ।
पथ संचलन के माध्यम से जेएनयू के छात्रों ने संदेश दिया कि उनके लिए राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि है और वे भारत विरोधी ताकतों से लड़ने के लिए हमेशा तत्पर हैं। जेएनयू के छात्र समुदाय ने इस पथ संचलन को आयोजित करके दिखाया कि वे शिक्षा और समाज के उन मूल्यों के साथ खड़े हैं, जिनके लिए एक विश्वविद्यालय को जाना जाता है। सशक्त और संगठित होकर छात्र शिक्षा के क्षेत्र में सुधार कर सकते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित दिल्ली प्रांत के सह प्रांत प्रचारक श्रीमान विशाल जी ने छात्रों को आरएसएस के संस्थापक परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी से राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लेने को कहा। उन्होंने कहा कि एक स्वयंसेवक वही है जो स्वयं प्रेरणा से समाज हित के लिये कार्य करे और भारत को फिर से उसी विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करे। उन्होंने अतीत में स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए बलिदानों को बता कर सभी स्वयंसेवकों को प्रेरित किया।


